Tuesday, February 23, 2010

केमिकल क्लीनिंग से लौटी रौनक

रीतेश पुरोहित


14 feb/ नई दिल्ली ।। लंबे समय से उपेक्षा झेल रहे दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स ने संजीवनी का काम किया है और इसके नतीजे अब दिखने लगे हैं। इन स्मारकों का वैभव लौटने लगा है। साउथ दिल्ली के शाहपुर जाट इलाके में ऐतिहासिक सीरी फोर्ट और इसके एकदम नजदीक बनी मोहम्मदीवाली मस्जिद को देखें, तो यह बात सच साबित हो जाती है। आकिर्यॉलजिकल सवेर् ऑफ इंडिया (एएसआई) ने केमिकल क्लीनिंग के जरिए इस ऐतिहासिक स्मारक की गुम हो चुकी चमक को वापस ला दिया है।


एएसआई की दिल्ली सर्कल के सुपरिंटेंडेंट आर्किलॉजिस्ट के. के. मोहम्मद ने बताया कि केमिकल क्लीनिंग के जरिए इस मस्जिद को पूरी तरह साफ किया गया है। धूल, मिट्टी व गंदगी जमने से इस पर बनीं खूबसूरत डिजाइनें और इबारत दिखनी बंद हो गई थीं। केमिकल क्लीनिंग से यह साफ-साफ नजर आने लगी हैं। अब इस स्मारक में पनिंग (चूने को लंबे समय तक गलाए रखना और फिर इस्तेमाल करना) का काम बाकी है। इसके बाद पूरे एरिया का सौंदयीर्करण किया जाएगा। इस मस्जिद के कन्जवेर्शन में 17.5 लाख रुपये खर्च होंगे। हमने दिसंबर में यहां काम शुरू किया था। 70 पसेंट काम हो गया है और एक-दो महीनों में इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है।
एएसआई के साइंस डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया इस स्मारक की क्लीनिंग के लिए अमोनिया के लिक्विड का यूज किया जाता है। इससे इमारत पर जमी गंदगी और कालापन निकल जाता है। बाद में इसमें प्रिजरवेटिव का यूज किया जाता है, जो बरसात के पानी को दीवारों के अंदर जाने से रोकता है। कई बार जरूरत के मुताबिक इनमें मुलतानी मिट्टी का लेप लगाया जाता है। इस मिट्टी से किसी हेरिटेज इमारत में चमक आ जाती है।
कन्जवेर्शन वर्क से पहले लोदी काल की यह ऐतिहासिक मस्जिद खंडहर में बदल गई थी। पूरी इमारत पर या तो छोटे-छोटे पौधे उग आए थे या काई जम गई थी। कुछ हिस्सा टूट भी गया था। हालांकि कुछ साल पहले एएसआई ने ही यहां कन्जवेर्शन का काम कराया, लेकिन इसमें चूने के बजाय सीमेंट का इस्तेमाल हुआ, जबकि किसी भी ऐतिहासिक इमारत की मरम्मत के लिए चूना व मोरम का ही इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि सैकड़ों साल पहले ये इमारतें इसी मटीरियल से बनाई जाती थीं। एएसआई के अधिकारी इस बात को मानते हैं। उनका कहना है कि अब हम इस सीमेंट को भी हटा देंगे। उनका कहना है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए हमें आज तक इतना बजट नहीं मिला।
लोदी काल की इस इमारत के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। अलाउद्दीन खिलजी के जमाने में बनी ऐतिहासिक सिरी वॉल और यह मस्जिद कॉमनवेल्थ गेम्स के एक मुख्य वेन्यू सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लैक्स के एकदम नजदीक है। गेम्स के दौरान यहां स्कवैश और बैडमिंटन की प्रतियोगिताएं होंगी। ऐसे में खिलाड़ियों के अलावा हजारों टूरिस्ट भी यहां आएंगे और उम्मीद है कि वे इन ऐतिहासिक इमारतों को भी देखने आएंगे। उन्हें ये स्मारक खराब स्थिति में दिखेंगे, तो देश की बड़ी किरकिरी होगी। इसी वजह से इन दोनों को ही कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुने गए 46 स्मारकों की लिस्ट में शामिल किया गया है।

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